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आर्थिक तंगी और भुखमरी से हुई मौत का जिम्मेदार कौन? 👍अमन पठान, एटा का क्रांतिकारी पत्रकार टूटी फूटी झोपड़ी की कच्ची दीवार, बिखरा हुआ सामान और बिस्तर पर पड़ी सिलवटें चीख चीखकर परिवार के मुफलिस गरीब होने की गवाही दे रही हैं। बिना दरवाजे वाले घर की चौखट पर रखा राशन एक गरीब की मौत पर मिला उपहार है। एटा जिले की नगर पंचायत मिरहची के जिन्हैरा में बीते बुधवार की रात लालाराम के 26 वर्षीय बेटे राधाकृष्ण ने आर्थिक तंगी और भुखमरी से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। राधाकृष्ण की मौत से पता चलता है मर गया पूरा सरकारी सिस्टम? फाइलों दफन हो चुकी हैं गरीबों के लिए चलाई जाने वाली जन कल्याणकारी योजनाएं? कहां हैं सरकारी संवेदनाएं? आखिर कहां हैं वो इलाके के रहनुमा? आइए और देखिए अमृतकाल में क्यों हुई है एक गरीब की भुखमरी से मौत? अफसोस तो इसका है कि मृतक के पिता को पिछले आठ महीने से वृद्धा पेंशन नहीं मिली थी। तमाम कोशिशों के बावजूद मृतक का नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ सका था। मृतक लकवा ग्रस्त होने के कारण मजदूरी भी नहीं कर सकता था। परिवार का भरण पोषण सरकारी राशन और इलाके के वाशिंदों के रहमो-करम हो रहा है। मृतक के पिता लालाराम स्थानीय लोगों भीख मांगकर लाते थे तब में चूल्हा जलता था। लालाराम पिछले कुछ समय से बीमार हैं और चलने फिरने से मोहताज हो गए हैं। जिस कारण परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था और कई दिन से घर में चूल्हा नहीं जला था। बस इसी से परेशान होकर राधाकृष्ण ने आत्महत्या कर ली और सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगा दिया कि आजादी के 79 साल बाद भी गरीब भुखमरी और आर्थिक तंगी से परेशान हैं।

ByDeepak Bhardwaj

Jan 10, 2026

आर्थिक तंगी और भुखमरी से हुई मौत का जिम्मेदार कौन?
👍अमन पठान, एटा का क्रांतिकारी पत्रकार
टूटी फूटी झोपड़ी की कच्ची दीवार, बिखरा हुआ सामान और बिस्तर पर पड़ी सिलवटें चीख चीखकर परिवार के मुफलिस गरीब होने की गवाही दे रही हैं। बिना दरवाजे वाले घर की चौखट पर रखा राशन एक गरीब की मौत पर मिला उपहार है।
एटा जिले की नगर पंचायत मिरहची के जिन्हैरा में बीते बुधवार की रात लालाराम के 26 वर्षीय बेटे राधाकृष्ण ने आर्थिक तंगी और भुखमरी से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
राधाकृष्ण की मौत से पता चलता है मर गया पूरा सरकारी सिस्टम? फाइलों दफन हो चुकी हैं गरीबों के लिए चलाई जाने वाली जन कल्याणकारी योजनाएं? कहां हैं सरकारी संवेदनाएं? आखिर कहां हैं वो इलाके के रहनुमा? आइए और देखिए अमृतकाल में क्यों हुई है एक गरीब की भुखमरी से मौत?
अफसोस तो इसका है कि मृतक के पिता को पिछले आठ महीने से वृद्धा पेंशन नहीं मिली थी। तमाम कोशिशों के बावजूद मृतक का नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ सका था। मृतक लकवा ग्रस्त होने के कारण मजदूरी भी नहीं कर सकता था। परिवार का भरण पोषण सरकारी राशन और इलाके के वाशिंदों के रहमो-करम हो रहा है। मृतक के पिता लालाराम स्थानीय लोगों भीख मांगकर लाते थे तब में चूल्हा जलता था। लालाराम पिछले कुछ समय से बीमार हैं और चलने फिरने से मोहताज हो गए हैं। जिस कारण परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था और कई दिन से घर में चूल्हा नहीं जला था। बस इसी से परेशान होकर राधाकृष्ण ने आत्महत्या कर ली और सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगा दिया कि आजादी के 79 साल बाद भी गरीब भुखमरी और आर्थिक तंगी से परेशान हैं।

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