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डिबाई क्षेत्र के कर्णवास गंगा किनारे बालू खनन में पशु क्रूरता, प्रशासन मौन

 

डिबाई क्षेत्र के कर्णवास गंगा किनारे से सामने आई तस्वीरें और वीडियो मानवता को शर्मसार करने वाले हैं। इन दृश्यों में अवैध व अनियंत्रित बालू खनन में लगे लोगों द्वारा पशुओं के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार का खुलासा हुआ है। रोज़ी-रोटी के लिए श्रम करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि बेसहारा और निरीह पशुओं पर अत्याचार किया जाए। जब भी यहां कोई इस प्रकार की घटना होते दिखाई देती है तो स्थानीय लोग और गंगासेवकों कि टीम द्वारा यहां पहुँचकर किसी ना किसी की जान बचाने के लिए कदम उठाया जाता है

स्थानीय लोगों के अनुसार कर्णवास गंगा किनारे यह कोई एक-दो दिन की घटना नहीं है, बल्कि हर रोज़ ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं। भारी-भरकम बालू ढोने के लिए पशुओं से क्षमता से अधिक काम लिया जाता है। कई बार उन्हें बेरहमी से पीटा जाता है, भूखा-प्यासा रखा जाता है और घायल अवस्था में भी काम पर लगाया जाता है। इन हालातों को देखकर संवेदनशील लोगों का दिल कांप उठता है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। न तो पशु क्रूरता निवारण कानून का पालन हो रहा है और न ही अवैध बालू खनन पर प्रभावी नियंत्रण दिख रहा है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामवासियों और समाजसेवियों ने मांग की है कि गंगा किनारे हो रहे बालू खनन की नियमित निगरानी की जाए, पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और वैकल्पिक साधनों का उपयोग अनिवार्य किया जाए। साथ ही पशु कल्याण संगठनों को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस अमानवीय स्थिति का समाधान कौन करेगा? यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो यह न केवल पशुओं के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरा आघात साबित होगा

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