कौशांबी में गरीबी की त्रासदी: पैसों की तंगी ने मां से छीन
लिया मातृत्व, 6 साल के बेटे को 95 हजार में बेचा, पुलिस ने बच्चे को सकुशल कराया बरामद
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गरीबी और आर्थिक तंगी किस हद तक इंसान को मजबूर कर सकती है, इसका भयावह उदाहरण इस घटना में देखने को मिला, जहां एक मां ने अपने ही 6 साल के मासूम बेटे को महज 95 हजार रुपये में बेच दिया। इस घटना के उजागर होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हालांकि पुलिस की तत्परता और सक्रियता से बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया, जिससे एक बड़ा अनहोनी टल गई।
मामला पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के खरौना गांव का है। 21 जनवरी को बृजेश कुमार पुत्र सुकुरु ने स्थानीय पुलिस थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ममता देवी ने उनके 6 वर्षीय बेटे को कहीं बेच दिया है। पिता की इस शिकायत के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर ममता देवी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान ममता देवी ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
पुलिस पूछताछ में ममता देवी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि वह लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। घर की खराब माली हालत, रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में हो रही परेशानी और कर्ज के दबाव ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था। इसी मजबूरी में उसने अपने बेटे को बेचने का खौफनाक फैसला कर लिया।
ममता देवी ने बताया कि उसने अनिता शुक्ला नाम की महिला के जरिए अपने बेटे को एक अज्ञात व्यक्ति को 95 हजार रुपये में बेच दिया। इस सौदे के बाद उसे कुल रकम में से केवल 22 हजार 700 रुपये ही शेष बचे थे, जबकि बाकी पैसा वह पहले ही घरेलू खर्चों और अन्य जरूरतों में खर्च कर चुकी थी।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने तत्काल अनिता शुक्ला की तलाश शुरू की और उसके जरिए बच्चे तक पहुंचने का प्रयास तेज कर दिया। पुलिस की कई टीमों को अलग-अलग दिशाओं में रवाना किया गया। मोबाइल सर्विलांस और स्थानीय मुखबिरों की मदद से पुलिस ने कुछ ही समय में आरोपी महिला की लोकेशन ट्रेस कर ली।
लगातार दबिश और कड़ी मेहनत के बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बताया जा रहा है और उसे उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। बेटे को सकुशल देखकर पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। गांव वालों ने भी राहत की सांस ली कि मासूम किसी बड़ी अनहोनी का शिकार होने से बच गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाल तस्करी और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनिता शुक्ला की भूमिका की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
इस घटना ने समाज में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या गरीबी आज भी इतनी भयावह है कि एक मां अपने ही कलेजे के टुकड़े को बेचने पर मजबूर हो जाए? क्या सरकारी योजनाएं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच पा रहे हैं? यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था का, बल्कि सामाजिक व्यवस्था की भी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ममता देवी की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और परिवार पहले से ही कठिन हालात में जीवन बिता रहा था। हालांकि किसी भी परिस्थिति में एक मां द्वारा अपने बच्चे को बेचना अक्षम्य अपराध है, लेकिन यह घटना समाज और सरकार दोनों के लिए आत्ममंथन का विषय है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बच्चे की काउंसलिंग कराई जा रही है और उसे मानसिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए बाल कल्याण समिति को भी सूचना दी गई है। साथ ही आरोपी महिला को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग हैरान हैं कि किस तरह आर्थिक तंगी इंसान को अमानवीय बना सकती है। यह घटना एक चेतावनी है कि यदि समय रहते समाज और शासन ने कमजोर वर्गों की मदद नहीं की, तो ऐसी त्रासद घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
