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मंदिर के पीछे चल रही थी गांजे की खेती, पुजारी निकला तस्करी का मास्टरमाइंड

भजन-कीर्तन की आड़ में फल-फूल रहा था अवैध धंधा, 70 लाख की सामग्री बरामद

तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज और आस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। जिस पुजारी को लोग श्रद्धा की नजर से देखते थे, वही पुजारी मंदिर परिसर के पीछे गेंदे के फूलों की आड़ में गांजे की खेती कर रहा था। पुलिस ने इस सनसनीखेज खुलासे में करीब 70 लाख रुपये की गांजा और उससे जुड़ी सामग्री बरामद की है।

यह मामला संगारेड्डी जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र का है, जहां वर्षों से एक मंदिर में पूजा-अर्चना कराने वाला पुजारी लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ था। सुबह-शाम मंदिर में भजन-कीर्तन, आरती और धार्मिक अनुष्ठान होते थे, जिससे किसी को भी उस पर शक करने का मौका नहीं मिला। लेकिन इसी धार्मिक छवि के पीछे एक अवैध कारोबार चुपचाप फल-फूल रहा था।

गेंदे के फूलों के बीच छिपा था गांजे का खेत

पुलिस जांच में सामने आया कि पुजारी ने मंदिर के पीछे खाली पड़ी जमीन पर गेंदे के फूलों की खेती दिखावे के तौर पर की थी। इन फूलों के बीच और अंदरूनी हिस्से में गांजे के पौधे उगाए गए थे, ताकि बाहर से देखने पर किसी को शक न हो। खेत की देखरेख पुजारी खुद करता था और दोपहर के समय, जब मंदिर में ज्यादा भीड़ नहीं होती थी, तब वह गांजे के पौधों को पानी देता और उनकी देखभाल करता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुजारी का व्यवहार बेहद सादा और धार्मिक था। वह हमेशा सफेद वस्त्र पहनता, भजन करता और धर्म की बातें करता था। इसी वजह से गांव वालों को कभी अंदाजा नहीं हुआ कि वह नशे के कारोबार में लिप्त हो सकता है।

गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने मारा छापा

पुलिस को इस अवैध खेती की जानकारी किसी गुप्त सूत्र से मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने गोपनीय तरीके से निगरानी शुरू की। कई दिनों तक मंदिर और उसके आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी गई। जब पुलिस को पुख्ता सबूत मिले, तब एक विशेष टीम का गठन कर छापेमारी की गई।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मंदिर के पीछे खेत में गांजे के सैकड़ों पौधे पाए। मौके से तैयार गांजा, सुखाने के उपकरण, तौलने की मशीनें और पैकेजिंग से जुड़ा सामान भी बरामद किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए गांजे और अन्य सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 70 लाख रुपये है।

पुजारी गिरफ्तार, पूछताछ जारी

पुलिस ने मौके से पुजारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। शुरुआती पूछताछ में उसने गांजे की खेती और उसकी बिक्री की बात कबूल की है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या वह अकेले इस धंधे को चला रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पुजारी गांजे को आसपास के जिलों और संभवतः अन्य राज्यों में सप्लाई करता था। इसके लिए वह धार्मिक पहचान का इस्तेमाल करता था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

गांव में फैली सनसनी, लोग हैरान

इस खुलासे के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है। मंदिर में रोज पूजा करने आने वाले श्रद्धालु हैरान हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस व्यक्ति को वे धर्मगुरु मानते थे, वह इस तरह के अवैध काम में लिप्त हो सकता है।

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “वह हमें हमेशा सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाता था। हमें नहीं पता था कि वह खुद इतना बड़ा अपराध कर रहा है।”

आस्था की आड़ में अपराध पर सवाल

यह मामला एक बार फिर इस बात पर सवाल खड़ा करता है कि आस्था और धार्मिक पहचान की आड़ में अपराधी किस तरह लोगों को धोखा दे सकते हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में समाज को सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी व्यक्ति को केवल उसके बाहरी धार्मिक रूप से नहीं, बल्कि उसके कार्यों से परखना चाहिए।

पुलिस का संदेश

संगारेड्डी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर आए, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है, चाहे वह पुजारी हो या आम नागरिक।

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध खेती से जुड़े और कौन-कौन लोग इसमें शामिल थे।

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि आस्था के नाम पर किसी को भी आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

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