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रामपुर में सीओ की कथित जातिसूचक टिप्पणी का वीडियो वायरल, सियासत तेज, एसपी ने बैठाई जांच

रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में तैनात एक पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) का कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है और विभिन्न सामाजिक संगठनों व राजनीतिक दलों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं।

बताया जा रहा है कि यह वीडियो मिलक क्षेत्र के एक स्कूल का है, जहां किसी कार्यक्रम के दौरान सीओ छात्रों और स्थानीय लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित रूप से एक विशेष समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। वायरल वीडियो में उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है—“पहले हाथ सरदारों का, बाकी चोर…”। यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग इसे जातिसूचक और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं।

वीडियो के वायरल होते ही विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कई नेताओं ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि पुलिस का दायित्व सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करना है, ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। कुछ संगठनों ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय स्तर पर भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान तो सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम सामान्य रूप से चल रहा था और उसी दौरान यह टिप्पणी की गई। अब यह भी जांच का विषय है कि बयान किस संदर्भ में दिया गया और क्या इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है या नहीं।

दूसरी ओर, मामले को गंभीरता से लेते हुए रामपुर के पुलिस अधीक्षक ने जांच बैठा दी है। एसपी ने कहा है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है। संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में किसी भी प्रकार की भेदभावपूर्ण टिप्पणी या आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में टिप्पणी को जातिसूचक और आपत्तिजनक पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई संभव है। हालांकि फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।

इस बीच सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। जहां एक पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं कुछ लोग पूरे बयान को संदर्भ सहित सामने लाने की बात कह रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि वीडियो का छोटा हिस्सा वायरल किया गया है, जबकि पूरा बयान सामने आने के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा। यह प्रकरण एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों के बयान और व्यवहार का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

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