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बजट वाले दिन फिर धड़ाम: MCX पर सोना-चांदी में भारी गिरावट, निवेशकों में हड़कंप

नई दिल्ली। बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए बड़े क्रैश से उबरने से पहले ही कीमती धातुओं ने एक बार फिर निवेशकों को जोर का झटका दे दिया है। रविवार को बजट पेश होने के दिन शेयर बाजार के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट MCX पर भी ट्रेडिंग देखने को मिली, जहां खुलते ही गोल्ड और सिल्वर दोनों में तेज बिकवाली शुरू हो गई। ओपनिंग के साथ ही 1 किलोग्राम चांदी की कीमत में करीब 27,000 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी चांदी के नक्शे-कदम पर चलते हुए 9,000 रुपये से ज्यादा टूट गया।

इससे पहले बीते सप्ताह गोल्ड-सिल्वर में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ही कारोबारी दिन में चांदी की कीमतों में 30 फीसदी से ज्यादा का क्रैश आया था, जबकि सोना भी करीब 17 फीसदी तक फिसल गया था। इतने कम समय में आई इस तेज गिरावट ने बाजार की धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन धातुओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

ओपनिंग में ही भारी बिकवाली

बजट वाले दिन रविवार को MCX पर ट्रेडिंग शुरू होते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई और कुछ ही मिनटों में इसके भाव हजारों रुपये नीचे आ गए। सोने में भी यही हाल देखने को मिला और निवेशकों ने मुनाफावसूली के साथ-साथ नुकसान से बचने के लिए तेजी से पोजीशन काटनी शुरू कर दी। बाजार जानकारों का कहना है कि बीते सप्ताह की भारी गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है, जिसका असर रविवार की ट्रेडिंग में साफ दिखाई दिया।

क्यों टूटीं कीमतें?

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता जैसी कई वजहें सोना-चांदी पर दबाव बना रही हैं। इसके अलावा, बजट से पहले और बजट के दिन निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए, जिससे कमोडिटी मार्केट में भी सतर्कता हावी रही। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद सोना-चांदी ओवरबॉट जोन में थे और करेक्शन की संभावना पहले से बनी हुई थी, जो अब तेज गिरावट के रूप में सामने आई।

निवेशकों में चिंता का माहौल

सोना और चांदी पारंपरिक तौर पर सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, लेकिन इतनी तेज गिरावट ने छोटे और रिटेल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कई निवेशक, जिन्होंने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी, अब नुकसान में नजर आ रहे हैं। बाजार में यह चर्चा भी तेज है कि अगर वैश्विक संकेत कमजोर बने रहे तो आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

आगे क्या?

विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट को अवसर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम बना हुआ है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संकेत, डॉलर की चाल और आर्थिक नीतियों से जुड़े फैसले सोना-चांदी की दिशा तय करेंगे।

कुल मिलाकर, बजट वाले दिन सोना-चांदी में आई इस नई गिरावट ने साफ कर दिया है कि कमोडिटी बाजार में अस्थिरता अभी खत्म नहीं हुई है। निवेशकों के लिए सतर्कता और सही रणनीति ही इस दौर में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है।

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