Wed. Feb 4th, 2026

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में चल रही तीखी बहस के बीच एक दृश्य ने राजनीतिक गलियारों से निकलकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान जब गृह मंत्री अमित शाह उन्हें टोकने के लिए अपनी सीट से खड़े हुए, तभी उनके पीछे बैठे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी जोश में उठ खड़े हुए। यह पूरा दृश्य कैमरों में कैद हो गया, लेकिन चर्चा का विषय बहस नहीं बल्कि अनुराग ठाकुर की बेल्ट बन गई।

दरअसल, जैसे ही अनुराग ठाकुर खड़े हुए, उनकी कमर में पहनी बेल्ट कैमरे की नजर में आ गई। कुछ सेकेंड के इस वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर बार-बार साझा किया जा रहा है। वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह बेल्ट अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांड Louis Vuitton (LV) की है, जिसकी कीमत लगभग 82 हजार रुपये बताई जा रही है। कुछ यूजर्स का यह भी कहना है कि कैमरा पड़ते ही अनुराग ठाकुर बेल्ट को ढकने की कोशिश करते हुए नजर आए, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही अनुराग ठाकुर और न ही उनकी ओर से इस वायरल बेल्ट को लेकर कोई बयान सामने आया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ चुकी है। खासकर विपक्षी समर्थक इसे सत्तापक्ष की कथनी और करनी के फर्क से जोड़कर देख रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो नेता सार्वजनिक मंचों से स्वदेशी अपनाने, ‘मेक इन इंडिया’ और विदेशी सामान के बहिष्कार की बात करते हैं, उनके द्वारा कथित तौर पर इतना महंगा विदेशी ब्रांड इस्तेमाल करना कितना उचित है। यूजर्स ने इस मुद्दे को राहुल गांधी की टी-शर्ट को लेकर पहले हुई बहस से भी जोड़ दिया है। याद दिलाया जा रहा है कि कुछ समय पहले राहुल गांधी की टी-शर्ट की कीमत को लेकर लंबी राजनीतिक बहस चली थी, तब सत्तापक्ष के कई नेताओं ने इसे आम आदमी से जुड़ाव के सवाल से जोड़ा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज के दौर में राजनीति सिर्फ संसद या रैलियों तक सीमित नहीं रही है। नेताओं के कपड़े, घड़ी, चश्मा और अब बेल्ट तक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं। कैमरों और सोशल मीडिया के इस युग में हर छोटी-सी चीज बड़े प्रतीक में बदल जाती है, जिसे पक्ष और विपक्ष अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल करते हैं।

इस पूरे मामले में यह भी गौर करने वाली बात है कि संसद की गंभीर बहसों के बीच ऐसे मुद्दे मूल सवालों से ध्यान भटका देते हैं। महंगाई, बेरोजगारी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की जगह नेताओं की व्यक्तिगत पसंद चर्चा का केंद्र बन जाती है।

फिलहाल, अनुराग ठाकुर की बेल्ट को लेकर उठे सवाल सोशल मीडिया तक सीमित हैं और आधिकारिक स्तर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि राजनीति में अब प्रतीक और छवियां उतनी ही अहम हो गई हैं, जितनी नीतियां और

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