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कर्णवास में पशु चिकित्सालय की लापरवाही पर उठे सवाल, घायल नीलगाय की मदद को आगे आए गंगासेवक,

(बुलंदशहर) डिबाई क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव कर्णवास में एक बेसहारा वन्य जीव नीलगाय को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और गंगासेवकों की टीम ने मानवता की मिसाल पेश की। जानकारी के अनुसार एक नीलगाय का पीछा कुत्तों का झुंड कर रहा था। अपनी जान बचाने के लिए दौड़ती हुई नीलगाय कर्णवास गांव में एक घर में जा घुसी।
ग्रामीणों ने तुरंत कुत्तों को वहां से भगाया और घायल नीलगाय को पानी पिलाकर सुरक्षित स्थान पर रखा। इसके बाद ग्रामीणों ने कर्णवास निवासी गंगासेवकों की टीम को सूचना दी। गंगासेवक पंकज बघेल ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
घायल नीलगाय के उपचार के लिए गंगासेवकों ने कर्णवास स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय के चिकित्सक से संपर्क किया, लेकिन पंकज बघेल ने बताया तथा स्थानीय लोगों का आरोप है कि चिकित्सक द्वारा उपचार के लिए आने में टालमटोल की गई। टीम के सदस्यों ने उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी कोई पशु चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों और टीम के अनुसार सुबह करीब 11 बजे से शाम 4 बजे तक इंतजार करने के बावजूद घायल नीलगाय दर्द से तड़पती रही। आखिरकार स्थानीय लोगों ने स्वयं प्रयास कर नीलगाय का प्राथमिक उपचार कराया और वन विभाग की सहायता करते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया।
गंगासेवकों ने आरोप लगाया कि कर्णवास गंगा किनारे हर कभी ना कभी ऐसी घटना होती रहती हैं लेकिन वन्य जीवों और बेसहारा पशुओं के उपचार के मामलों में अक्सर ऐसी ही स्थिति सामने आती है। उनका कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण पहले भी कई पशुओं की जान जा चुकी हैं। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पशु चिकित्सकों की कार्यप्रणाली में सुधार और आपात स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। पंकज बघेल ने बताया कि गांव में पशु अस्पताल है लेकिन वो वीरान पड़ा है उसमें ना तो साफ सफाई है ना ही कोई डॉक्टर बैठता है प्रेमपाल सिंह ने कहां कि ऐसे अस्पताल से क्या फायदा जब समय पर उपचार न मिले। इस मौके पर GSPM पंकज बघेल, प्रेमपाल सिंह, नरेन्द्र सिंह, वेदराम सिंह पुष्पेन्द्र, गौरव, चंद्रकांत शर्मा, अन्य गढ़ मान्य लोग मौजूद रहे।

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