सतुआ बाबा से जुड़ जाएं, जो नहीं जुड़ेगा…आखिरी वक्त में उनके पास ही जाएगा, वह काशी में मणिकर्णिका घाट पर बैठते हैं। – योगी आदित्यनाथ
योगी ने 10 जनवरी को जिन सतुआ बाबा का जिक्र प्रयागराज के मंच से किया, वो यूपी की सियासत की सुर्खियों में हैं। कभी माघ मेला में ये युवा संत 3 करोड़ की लैंड रोवर डिफेंडर कार से पहुंचकर सबको चौंका देते हैं।
अक्सर CM के साथ दिखने वाले संत महंगे रे-बैन के सनग्लास पहनते हैं। अमूमन हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज के साथ उनकी तस्वीरें सामने आती रहती हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं, सतुआ बाबा उनका असली नाम नहीं है, बल्कि वो वाराणसी के जिस विष्णु स्वामी संप्रदाय की पीठ से आते हैं, उसके प्रमुख को ‘सतुआ बाबा’ कहा जाता है।
उनका असली नाम संतोष तिवारी (संतोष दास) है, वो यूपी के ललितपुर के रहने वाले हैं। हाल में वो 3 घटनाओं के बाद चर्चा में आए-
पहली- माघ मेला में सतुआ बाबा को आश्रम के लिए सबसे ज्यादा जमीन अलॉट की गई। सबसे बड़ा आश्रम उन्हीं का है।
दूसरी- प्रयागराज डीएम उनके आश्रम में पहुंचे और जमीन पर बैठकर रोटियां सेंकी।
तीसरी- डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इसके 6 दिन बाद प्रयागराज पहुंचे, डीएम से कहा- आश्रम में रोटियां मत सेंकिए, फील्ड में थोड़ा काम करिए।
