
अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग: 118 नियुक्तियां, गायब फाइलें और सिस्टम की ‘खामोशी’ – क्या यह सिर्फ लापरवाही है या सोची-समझी साजिश?
👉अलीगढ़। सरकारी विभागों में ‘फाइलें गुम होना’ कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला 118 लोगों के भविष्य और करोड़ों के बजट से जुड़ी नियुक्तियों का हो, तो यह “गुमशुदगी” गहरे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में साल 2012 में हुई संविदा भर्तियों को लेकर उठे सवालों ने अब एक बड़े घोटाले का रूप ले लिया है।
## मामला क्या है?
साल 2012 में अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 30 डॉक्टरों सहित कुल 118 संविदा कर्मियों की नियुक्तियां की गई थीं। नियम कहते हैं कि ऐसी भर्तियों के लिए बाकायदा विज्ञापन, इंटरव्यू बोर्ड का गठन और चयन मेरिट की फाइलें सुरक्षित होनी चाहिए। लेकिन आज जब इन भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठे, तो विभाग का जवाब हैरान करने वाला है— “रिकॉर्ड गायब है!”
## दलील: शिफ्टिंग में खो गई फाइलें!
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की ओर से दलील दी गई कि साल 2015 में कार्यालय की शिफ्टिंग के दौरान ये महत्वपूर्ण दस्तावेज संभवतः नष्ट हो गए या खो गए। सवाल यह है कि क्या 118 नियुक्तियों जैसी संवेदनशील प्रक्रिया का रिकॉर्ड इतना मामूली था कि उसे कबाड़ समझकर छोड़ दिया गया? सरकारी दस्तावेजों के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?
## सूचना आयोग की सख्ती भी बेअसर
यह मामला जब राज्य सूचना आयोग पहुंचा, तो आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी न देने पर आयोग ने धारा 20 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी। लेकिन हकीकत यह है कि एक साल से ज्यादा समय बीत जाने और दर्जनों तारीखें पड़ने के बाद भी न तो रिकॉर्ड मिला और न ही किसी दोषी पर गाज गिरी।
## वे सुलगते सवाल, जिनका जवाब ‘लापता’ है:
* विज्ञापन कहाँ है? अगर भर्तियां निष्पक्ष थीं, तो किस अखबार में विज्ञापन निकला था?
* चयन का आधार क्या था? इंटरव्यू बोर्ड में कौन-कौन शामिल था और अभ्यर्थियों को किस आधार पर अंक दिए गए?
* जिम्मेदारी किसकी? रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिस बाबू या अधिकारी की थी, उस पर आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
* दबाव का खेल: पीड़ित का आरोप है कि सच सामने लाने की कोशिश करने पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। क्या विभाग किसी “बड़े चेहरे” को बचाने की कोशिश कर रहा है?
## निष्कर्ष: नीयत पर सवाल
फाइलों का गायब होना अक्सर तब होता है जब सच को दफन करना हो। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की यह “लापरवाही” चीख-चीख कर कह रही है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को नौकरियां बांटी गई थीं। अब जबकि जांच की आंच पहुंच रही है, तो ‘रिकॉर्ड गायब’ होने का बहाना सबसे सुरक्षित रास्ता बन गया है।
क्या उत्तर प्रदेश शासन और स्वास्थ्य मंत्री इस मामले का संज्ञान लेंगे? क्या उन 118 नियुक्तियों की जांच होगी, जिनकी फाइलें आज सिस्टम की फाइलों में नहीं, बल्कि ‘साजिश के मलबे’ में दबी हैं?
क्या आप इस मामले में हालिया अदालती कार्रवाई या शासन द्वारा गठित किसी जांच कमेटी की ताजा रिपोर्ट के बारे में जानना चाहते हैं?
