कर्णवास में बिजली संकट से ग्रामवासी परेशान, बार-बार कटौती से बढ़ी मुश्किलें
कर्णवास क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और बिजली विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गाँव के लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में बिजली घर होने के बावजूद विभाग की मनमानी के कारण दिनभर में कई बार बिजली आपूर्ति बाधित होती रहती है। ग्रामीणों के अनुसार हर 10–15 मिनट में बिजली चली जाती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामवासियों का कहना है कि जब वे बिजली घर जाकर शिकायत करते हैं तो कर्मचारियों द्वारा उन्हें “ऊपर शिकायत करने” की बात कहकर टाल दिया जाता है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई उपभोक्ताओं ने समय पर अपना बिजली बिल जमा कर रखा है, इसके बावजूद उनके कनेक्शन काट दिए जा रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। भीषण गर्मी में लोग पंखा और कूलर के सहारे राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन लगातार बिजली कटने से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की हालत सबसे अधिक खराब हो रही है। घरों में मरीजों को गर्मी और उमस के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गाँव के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली विभाग के कर्मचारी तारों को सही तरीके से जोड़ने के बजाय ढीला छोड़ देते हैं, जिससे बार-बार फॉल्ट होता है और बिजली बाधित होती रहती है। बाद में तार ठीक करने के नाम पर लोगों से पैसे मांगे जाते हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
किसानों की परेशानी भी कम नहीं है। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली न मिलने से खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। कई बार घंटों तक बिजली गायब रहती है, जिससे फसलों में समय पर पानी नहीं लग पा रहा। किसान पूरे दिन बिजली आने का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन आपूर्ति सुचारु नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। अब क्षेत्र के लोग प्रशासन और बिजली विभाग से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
