
लोधी समाज ने वर्षों तक बड़े-बड़े नेताओं को सिर आँखों पर बैठाया। Dr. Swami Sakshi Ji Maharaj जी हों या Rajveer Singh – Raju Bhaiya जी, समाज ने हर बार भरोसा किया, समर्थन दिया, सम्मान दिया। लेकिन आज एक बड़ा सवाल खड़ा है। क्या लोधी समाज की राजनीति कुछ चुनिंदा चेहरों तक ही सीमित रहेगी? क्या नई पीढ़ी सिर्फ नारे लगाने और भीड़ बढ़ाने तक ही सीमित रहे? आज समाज का युवा पढ़ा-लिखा है, संघर्षशील है, जमीन से जुड़ा है। वह अपने अधिकार की बात कर रहा है।
अगर कोई युवा आगे बढ़ना चाहता है, तो क्या उसे रोका जाएगा? क्या उसके रास्ते में अदृश्य दीवारें खड़ी की जाएँगी? समाज का भविष्य कुछ लोगों की निजी जागीर नहीं है। नेतृत्व वंश या विरासत से नहीं संघर्ष, सेवा और जनता के विश्वास से तय होना चाहिए। अगर वरिष्ठ नेता सच में समाज के हितैषी हैं,
तो वे युवाओं को अवसर देने की बात करें,
नेतृत्व में भागीदारी दें, और खुद मार्गदर्शक बनें।
लेकिन अगर युवाओं को रोका जाएगा,तो याद रखिए इतिहास गवाह है कि नई पीढ़ी अपना रास्ता खुद बनाना जानती है। अब लोधी समाज का युवा निर्णय करेगा,वह सम्मान के साथ साझेदारी चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ी तो संघर्ष से भी पीछे नहीं हटेगा। यह चेतावनी नहीं
यह बदलाव की दस्तक है।
बाबूजी कल्याण सिंह को जब लगा कि समाज पर अत्याचार हो रहे हैं, लोधी समाज को अनदेखा किया जा रहा है तब बाबूजी कल्याण सिंह ने भाजपा को छोड़ दिया था, तो आज के नेता भाजपा के गुलाम क्यों है, क्योंकि वह अच्छे से जानते हैं कि भाजपा लोधी समाज की हितैषी नहीं है भाजपा लोधी समाज के नेताओं को धीरे-धीरे खत्म कर रही है,लेकिन आज का युवा बहुत जागरुक है समझदार है स्थिति और परिस्थिति को समझता है, युवा जिम्मेदारी को अपने कंधे पर ले रहे हैं और बड़ा बदलाव होने वाला है।
