ईरान युद्ध का असर: किचन से बेडरूम तक संकट, कंडोम उद्योग पर मंडराया खतरा
ईरान में जारी युद्ध का असर अब आम जनजीवन के हर हिस्से पर साफ नजर आने लगा है। जहां एक ओर इसका प्रभाव किचन तक पहुंच चुका है, वहीं अब बेडरूम से जुड़े उत्पाद भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासतौर पर कंडोम इंडस्ट्री पर इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक सप्लाई बाधित हुई है। इससे न केवल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। कंडोम निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण रॉ मटीरियल, जैसे लेटेक्स प्रोसेसिंग में उपयोग होने वाले केमिकल्स और लुब्रिकेंट्स, अब आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
भारत की करीब 860 मिलियन डॉलर की कंडोम मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री भी इस संकट से अछूती नहीं है। देश में हर साल लगभग 400 करोड़ यूनिट कंडोम का उत्पादन होता है, लेकिन अब उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर कंपनियों की उत्पादन क्षमता और बाजार में उपलब्धता पर पड़ सकता है।
सरकारी कंपनी HLL Lifecare Limited, जो हर साल करीब 221 करोड़ कंडोम बनाती है, भी इस समस्या से जूझ रही है। इसके अलावा निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां जैसे Mankind Pharma Limited और Cupid Limited भी सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण दबाव में हैं।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले महीनों में कंडोम की कीमतों में वृद्धि और बाजार में कमी देखी जा सकती है। इसका असर न केवल उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि जनस्वास्थ्य अभियानों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि सुरक्षित यौन संबंधों के लिए कंडोम एक अहम साधन है।
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक संकटों का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी के हर पहलू को प्रभावित कर सकता है।
