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नाव, रस्सी व जैकेट थीं मौजूद, फिर भी डिलीवरी बॉय मुनेंद्र ने संभाला मोर्चा; हादसे की रात के ‘हीरो’ को धमका रही पुलिस

ग्रेटर नोएडा में निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट में कार गिरने की दर्दनाक घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और बचाव व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई, लेकिन घटना की रात एक आम नागरिक—फ्लिपकार्ट डिलीवरी बॉय मुनेंद्र सिंह—ने जो साहस दिखाया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुनेंद्र सिंह के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद मौके पर पुलिस और बचाव दल पहुंच गया था। उनके पास नाव, रस्सी और लाइफ जैकेट जैसे संसाधन भी मौजूद थे, इसके बावजूद कोई भी कर्मी पानी से भरे बेसमेंट में उतरने को तैयार नहीं हुआ। युवराज मेहता कार में फंसे मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन प्रशिक्षित बचावकर्मियों की निष्क्रियता के बीच मुनेंद्र ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया।

जान जोखिम में डालकर मुनेंद्र पानी में उतरे और युवराज को बचाने की कोशिश की। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और युवराज को नहीं बचाया जा सका। मुनेंद्र का कहना है कि अगर समय रहते बचाव दल सक्रिय होता, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी।

अब इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया है, जब मुनेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस उन्हें चुप रहने के लिए धमका रही है। मुनेंद्र का दावा है कि उनसे कहा जा रहा है कि वे मीडिया से बात न करें और घटना के बारे में सवाल न उठाएं। उन्होंने बिल्डर की लापरवाही पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनके कारण बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता की कहानी बनती जा रही है—जहां संसाधन होते हुए भी इंसानी जान नहीं बचाई जा सकी, और जो व्यक्ति ‘हीरो’ बनकर सामने आया, वही आज दबाव और धमकियों का सामना कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में जवाबदेही तय करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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