Sun. Jun 21st, 2026

कोई भागीरथ मिले तो अलीगढ़ की काली नदी का हों उद्धार। गंगा जमुना दोआब में बसे अलीगढ़ में कभी दस नदियां थीं गंगा,जमुना,करबन, सेंगर,छोइया,नीम, रुतबा,बडगगा,व काली नदी जिनमें आज़ बड गंगा,सिरसा,रुतबा, सेंगर,व छोईया विलुप्त हो चुकी।अब सबसे चिंताजनक स्थिति अलीगढ़ की काली नदी की है इसमें आक्सीजन की मात्रा शून्य है इससे आस-पास के गांवों का भूजल भी ज़हरीला होने लगा है जिससे स्थानीय गांवों के किसानों को तमाम घातक बिमारियां की चपेट में घिरा देखा जा रहा है खतौली मुजफ्फरनगर से हापुड़ बुलंदशहर के रास्ते अलीगढ़ पहुंचती है साधु आश्रम के पास इसका प्रवाह तेज़ है गवाररा, गाज़ीपुर,अहमदपुरा,भवनगढी,चेडौली, खेड़ा,कलाई, मीरपुर का नगला, सिल्ला,विसावलपुर,बरानदी, धर्मपुर का नगला,पोथी,सुनहरा, सिकंदरपुर, कौड़ियां गंज आदि गांवों से होकर गुजरती है कभी इसके मीठे पानी से स्थानीय किसानों की प्यास बुझती थीं एवं करोड़ों जलीय जीव जंतु प्रजातियां,तट स्थित क्षेत्र में काले हिरण बहुतायत में थे आज़ अस्तित्व ख़तरे में पड़ गया जल प्रदूषित मुख्य कारक औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़ा जाता कैमिकल युक्त प्रदूषित पानी बीअर फैक्ट्री सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की जांच हेतु पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986,जल अधिनियम वायु अधिनियम 1981, जल अधिनियम 1974 के प्रावधानों का उल्लघंन करतीं औद्योगिक इकाइयों जो बिना समुचित अपशिष्ट प्रबंधन एवं शोधन व्यवस्था के दूषित जल,राख, एवं दुर्गंधयुक्त वायु का उत्सर्जित करता है उनकी जांच मांग जिलाधिकारी महोदय अलीगढ़ से संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा द्वारा की गई है अलीगढ़ वासियों के जनजीवन से खिलवाड़ एवं काली नदी अस्तित्व बचाए जाती मुहिम में आप भी संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा साथ सहभागिता सुनिश्चित करें 👍

ByDeepak Bhardwaj

Jan 18, 2026

कोई भागीरथ मिले तो अलीगढ़ की काली नदी का हों उद्धार।
गंगा जमुना दोआब में बसे अलीगढ़ में कभी दस नदियां थीं गंगा,जमुना,करबन, सेंगर,छोइया,नीम, रुतबा,बडगगा,व काली नदी जिनमें आज़ बड गंगा,सिरसा,रुतबा, सेंगर,व छोईया विलुप्त हो चुकी।अब सबसे चिंताजनक स्थिति अलीगढ़ की काली नदी की है इसमें आक्सीजन की मात्रा शून्य है इससे आस-पास के गांवों का भूजल भी ज़हरीला होने लगा है जिससे स्थानीय गांवों के किसानों को तमाम घातक बिमारियां की चपेट में घिरा देखा जा रहा है खतौली मुजफ्फरनगर से हापुड़ बुलंदशहर के रास्ते अलीगढ़ पहुंचती है साधु आश्रम के पास इसका प्रवाह तेज़ है गवाररा, गाज़ीपुर,अहमदपुरा,भवनगढी,चेडौली, खेड़ा,कलाई, मीरपुर का नगला, सिल्ला,विसावलपुर,बरानदी, धर्मपुर का नगला,पोथी,सुनहरा, सिकंदरपुर, कौड़ियां गंज आदि गांवों से होकर गुजरती है कभी इसके मीठे पानी से स्थानीय किसानों की प्यास बुझती थीं एवं करोड़ों जलीय जीव जंतु प्रजातियां,तट स्थित क्षेत्र में काले हिरण बहुतायत में थे आज़ अस्तित्व ख़तरे में पड़ गया जल प्रदूषित मुख्य कारक औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़ा जाता कैमिकल युक्त प्रदूषित पानी बीअर फैक्ट्री सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की जांच हेतु पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986,जल अधिनियम वायु अधिनियम 1981, जल अधिनियम 1974 के प्रावधानों का उल्लघंन करतीं औद्योगिक इकाइयों जो बिना समुचित अपशिष्ट प्रबंधन एवं शोधन व्यवस्था के दूषित जल,राख, एवं दुर्गंधयुक्त वायु का उत्सर्जित करता है उनकी जांच मांग जिलाधिकारी महोदय अलीगढ़ से संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा द्वारा की गई है अलीगढ़ वासियों के जनजीवन से खिलवाड़ एवं काली नदी अस्तित्व बचाए जाती मुहिम में आप भी संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा साथ सहभागिता सुनिश्चित करें 👍

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ट्रैक्टर थ्रेसर में फंसकर युवक की मौत, परिवार में मचा कोहराम अतरौली। कोतवाली क्षेत्र के गांव नऊरी भोजपुर में शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसे में 23 वर्षीय युवक की मौत हो गई। युवक ट्रैक्टर-थ्रेसर से करब की कुट्टी गोदते समय मशीन में फंस गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव नऊरी भोजपुर निवासी विवेक पुत्र जालीम सिंह (23 वर्ष) शुक्रवार रात करीब 10 बजे ट्रैक्टर-थ्रेसर से करब की कुट्टी तैयार करने का कार्य कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका हाथ मशीन में फंस गया और देखते ही देखते वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों एवं ग्रामीणों ने तत्काल घायल विवेक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अतरौली पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। देर रात उपचार के दौरान विवेक ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। विवेक अपने परिवार का बड़ा बेटा था और दो भाइयों में सबसे बड़ा था। ग्रामीणों ने बताया कि वह मेहनती और मिलनसार स्वभाव का युवक था। उसके असामयिक निधन से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार को गांव में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने कृषि कार्यों में उपयोग होने वाली मशीनों के संचालन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।